राज़ बहुत है मेंरी जिंदगी में चलो कुछ खोल कर दिखता हूँ।
एक अरसे बाद आज पुछा है किसी ने तो चलो मैं बताता हूँ।
राज़ बहुत है मेंरी जिंदगी में चलो कुछ खोल कर दिखता हूँ।
पुछते हैं अक्सर लोग हमसे मैं यूंही क्यों हर वक्त मुस्कुराता हूँ।
अब क्या बताऊं के कैसे मैं अपना हर एक गम इस हसी के पीछे चुपता हूँ।
कोई समझ ना बैठे कामजोर मुझे इसलिय कभी आशु नहीं बहाता हूँ।
सुना है जलते है कुछ लोग मेरी हसी से बस उनको यूं ही जलता हूँ।
दिखा नहीं सकता दर्द किसी को अपना बस इसलिय मैं हर वक्त मुस्कराता हूँ।
कैसे रोऊँ मैं आईने के सामने ये भी तो झूठा है।
दिखता है खुद को मेरे जैसा मगर मेरा साथ कहा दे पाता है।
लगती है जरा सी छोट जब इसे तो बिखर कर मुझे अपना दर्द दिखला है।
ये नहीं जनता के बिखर चुके हैं हम भी दर्द में बस खड़े रहना तो बहाना है।
मेरी तकदिर में लिखी हर ठोकर ने मुझे बहुत बार गिराया है।
तूने पूछा है के दर्द क्या है मेरा इसिलिए तुझे ये राज बताया है।
इतना आसन नहीं है किसी को भूल जाना, कोई कहाँ एक पल में जुदा हो पाता है।
होते हैं जब भी अकेले हम अक्सर मेरा अतीत हमें याद आता है।
भुलना तो हमें भी चाहते है हर उस शख्स को जिसने हमे रूलाया है।
खुदा की कसम बहुत दर्द होता है जब भीड़ में खुद को भी अकेले पाया है।
बड़ी आसनी से कह देते हो तुम भी के बड़ी अच्छी है जिंदगी तुम्हारी।
तुम्हें कैसे बताऊं हर रोज मर कर भला कौन जिंदा रह पाया है।
तुमने पूछा है तो बताता हूँ वरना कौन मेरे राज जान पाया है।
राज बहुत है मेरी जिंदगी में चलो कुछ खोल कर दिखता हूं।
आज सुन लो दास्तान मेंरी फिर न कहना कभी के मैं कहां कुछ बताता हूं।
जिंदगी बहुत लंबी है मेरी ये भी अक्सर सुना है हमने लोगो से।
मगर तुम ही बताओ ऐसी जिंदगी भी क्या कोई जीना चाहता है।
हर रोज समझाता हूं खुद को बदल जा दुनिया के दस्तूर के हिसाब से।
मगर छोड कर फितरत अपनी भला कोई कहां बदल पाता है।
हमें जीना भी है तो औरो की खतिर खुद के लिए तो हम कब के मर गए।
दफान करके खुद को अपने अंदर फिर भी मैं जिंदा हूँ यही दिखता हूं।
राज़ कुछ नहीं मेरी ज़िंदगी में सबको बस यही बताता हूँ।
मुझे ऐतबार नहीं अब खुद पर भी तो किसी और पर कैसे करुं।
शमा तो बहुत है आज भी मगर मैं वो परवाना अब कैसे बनू।
कोई समझे तो समझा भी दूँ के आखिर क्यों आज मैं खुद से ही नराज हूँ।
फेर लेते हैं अक्सर लोग हमसे जब भी कोई सच उन्हे बताता हूँ।
कभी कभी लगता है मेरी जिंदगी बस खिलोना सा बनकर रह गई है।
जो टूट कर खुद भी ना जाने क्यों लोगो को यूं ही हसाता हूं।
आज तुमने पूछा है राज मेरा चलो कुछ राज तो तुम्हें बताता हूं,
दास्तान बहुत लंबी है मेरी जिंदगी की आखिर कैसे सारी बता पाउंगा,
खत्म करते हैं इस बात को भी अब यहीं चलो मैं भी भूल जाता हूं,
राज बहुत है मेरी जिंदगी में चलो कुछ तो खोल कर दिखता हूं,

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