01-Oct-2021  

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लिखू मैं क्या आज कुछ समझ नहीं आता

लिखू मैं क्या आज कुछ समझ नहीं आता, दिल मैं दबा दर्द जुबां पर नहीं आता। 
शमा की तरह बुझ जाना है हमे भी एक दिन, गुजर जाते है दिन पर वो दिन नहीं आता। 
हर रोज मरते है अपनों की बेवफाई मैं , मरे उनकी वफ़ा पर जिस दिन वो दिन नहीं आता। 
छोड़ चुके है अपने साथ मेरा, रूह भी छोड़ दे साथ मेरा वो पल भी तो नहीं आता। 
आज हमने मिटा दी हर आरजू उनके आने की, फिर भी इस दिल को आराम नहीं आता। 
देती है तकलीफ उसकी हर याद मुझे, पर फिर भी न जाने क्यों  मैं उसे भुला नहीं पता। 
ये मेरी मज़बूरी नहीं है दोस्तों, ये तो चाहत है जो अब भी मैं उससे नफरत कर नहीं पता।